Avinash Krunar
05 Sep, 2024 09:05 AM
ठीक उसी तरह जिस बिजनेस के प्रति आपका दिल, दिमाग, आत्मा जुड़ा होता है वह बिजनेस कभी असफल नहीं हो सकता क्योंकि उसके प्रति आपको हमेशा परवाह होती है।
जब कोई व्यक्ति नेटवर्क मार्केटिंग को अपना बिजनेस मानता है तो उसकी संवेदनशीलता और चाहत इस बिजनेस के प्रति और ज्यादा होती है। वे दिन रात इस बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं, रोज नए लोगों से मिलते हैं, रोज नए लोगों को प्लान दिखाते हैं, रोज नए लोगों की लिस्ट तैयार करते हैं। ऐसे लोगों के मन में कभी भी यह खयाल नही आता की यह अपना बिजनेस नही है क्योंकि जिस बिजनेस में दिल, दिमाग जुड़ा हो वह बिजनेस पराया कैसे हो सकता है।
समाधान – नेटवर्क मार्केटिंग को हमेशा स्वयं का बिजनेस मानकर करें।
जब कोई व्यक्ति नेटवर्क मार्केटिंग को अपना बिजनेस मानता है तो उसकी संवेदनशीलता और चाहत इस बिजनेस के प्रति और ज्यादा होती है। वे दिन रात इस बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं, रोज नए लोगों से मिलते हैं, रोज नए लोगों को प्लान दिखाते हैं, रोज नए लोगों की लिस्ट तैयार करते हैं। ऐसे लोगों के मन में कभी भी यह खयाल नही आता की यह अपना बिजनेस नही है क्योंकि जिस बिजनेस में दिल, दिमाग जुड़ा हो वह बिजनेस पराया कैसे हो सकता है।
समाधान – नेटवर्क मार्केटिंग को हमेशा स्वयं का बिजनेस मानकर करें।
Avinash Krunar
05 Sep, 2024 09:03 AM
वे इस बिजनेस को अपना बिजनेस नही मानते
जब कोई इस बिजनेस में नया ज्वाइन होता है तो वह समझ लेता है की इस बिजनेस को बढ़ाने के जिम्मेदारी उसकी अपलाइन की है और जब उसके साथ उसके डाउनलाइन जुड़ने लगते हैं तो उसे लगता है अब डाउनलाइन ही इसे आगे बढ़ाएंगे, वे कभी अपलाइन को दोष देते हैं, कभी डाउनलाइन को तो कभी कंपनी को। ऐसे व्यक्ति कभी भी इस बिजनेस को अपना मानकर नही करते जिसके वजह से उन्हें एक दिन फेलियर का सामना करना पड़ता है।
जो वस्तु हमारी होती है उसके प्रति हमारी चाहत भी बहुत ज्यादा होती है। अगर किसी का फोन चोरी हो जाय तो आपको उतना दिक्कत नही होगा जितना खुद के फोन चोरी होने पर होता, अगर किसी का बच्चा धूल में खेल रहा है तो आप उसे ज्यादा ध्यान नहीं देंगे वही अगर आपका बच्चा धूल में खेले तो उसे तुरंत डांट लगाएंगे और उसे साफ करेंगे।
जब कोई इस बिजनेस में नया ज्वाइन होता है तो वह समझ लेता है की इस बिजनेस को बढ़ाने के जिम्मेदारी उसकी अपलाइन की है और जब उसके साथ उसके डाउनलाइन जुड़ने लगते हैं तो उसे लगता है अब डाउनलाइन ही इसे आगे बढ़ाएंगे, वे कभी अपलाइन को दोष देते हैं, कभी डाउनलाइन को तो कभी कंपनी को। ऐसे व्यक्ति कभी भी इस बिजनेस को अपना मानकर नही करते जिसके वजह से उन्हें एक दिन फेलियर का सामना करना पड़ता है।
जो वस्तु हमारी होती है उसके प्रति हमारी चाहत भी बहुत ज्यादा होती है। अगर किसी का फोन चोरी हो जाय तो आपको उतना दिक्कत नही होगा जितना खुद के फोन चोरी होने पर होता, अगर किसी का बच्चा धूल में खेल रहा है तो आप उसे ज्यादा ध्यान नहीं देंगे वही अगर आपका बच्चा धूल में खेले तो उसे तुरंत डांट लगाएंगे और उसे साफ करेंगे।
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