नई दिल्ली! एनडीए सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को किसान विरोधी मानते हुए अन्ना हजारे अगले सोमवार से दिल्ली के जंतर मंतर पर दो दिन के सांकेतिक धरने पर बैठने जा रहे हैं। देशभर से तमाम किसान संगठनों ने अन्ना के नेतृत्व में इस धरने का आयोजन किया है। इसका नाम दिया गया है, 'भूमि अधिग्रहण अध्यादेश प्रतिरोध आंदोलन।' धरने के चीफ को-ऑर्डिनेटर व पूर्व कर्नल नैन के मुताबिक, केंद्र सरकार का मौजूदा अध्यादेश पूरी तरह से किसानों के विरोध में है। इसके प्रावधान किसान हित में न होकर पूंजीपतियों के हित में हैं। उनका कहना था कि अध्यादेश के 70 फीसदी प्रावधान किसान विरोधी हैं। इसलिए देश के तमाम किसान संगठन इस धरने के लिए इकठ्ठा हो रहे हैं।
बजट सत्र से संगठनों को उम्मीद
किसान संगठनों की योजना के मुताबिक, दो दिन की सांकेतिक हड़ताल के दौरान केंद्र सरकार को अध्यादेश वापस लेने की एक डेडलाइन दी जाएगी। समय सीमा तक अध्यादेश वापस नहीं लिया गया तो देश भर से किसान दिल्ली की तरफ कूंच करेंगे। हालांकि संगठनों ने अपनी अगली रणनीति का खुलासा नहीं किया है। दरअसल, बजट सत्र में ही इस अध्यादेश पर कोई फैसला आने का उन्हें उम्मीद है। उन्हें डर है, अगर यह संसद से पास हो गया, तो उनके हाथ बंध जाएंगे। इसे देखते हुए किसान संगठन लगातार विभिन्न राजनैतिक दलों से भी संपर्क साध रहे हैं ताकि सदन में इस बिल का विरोध हो सके। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआईएम, आप व जेडीयू जैसे तमाम दलों ने इस मुद्दे पर किसान संगठनों को मदद का आश्वासन दिया है। उल्लेखनीय है कि किसान संगठनों ने राजनैतिक दलों से बाहर से समर्थन लेने की योजना बनाई है।
कई राज्यों के किसान पहुंच रहे हैं
सूत्रों के मुताबिक, 23 फरवरी को जहां अन्ना हजारे इस धरने की शुरुआत करेंगे। 24 फरवरी को वी. पी. राजगोपाल के नेतृत्व में पलवल से चली किसानों की रैली दिल्ली पहुंचेगी। राजगोपाल के अलावा, मेधा पाटकर, गोविंदाचार्य, डॉ. सुब्बा राव, राजेंद्र सिंह जैसे तमाम किसान नेता शामिल होंगे। हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार उत्तराखंड जैसे राज्यों से किसान दिल्ली पहुंच रहे हैं।